आत्मा क्या है? आत्मज्ञान द्वारा स्वयं की सच्ची पहचान
आज का मनुष्य संसार के हर विषय का ज्ञान प्राप्त कर रहा है, लेकिन एक प्रश्न ऐसा है जिस पर वह सबसे कम ध्यान देता है—
“मैं कौन हूँ?”
हम अपने नाम, पद, रिश्ते और शरीर को ही अपनी पहचान मान लेते हैं। लेकिन क्या यही हमारी सच्ची पहचान है?
आत्मज्ञान हमें सिखाता है कि हम यह शरीर नहीं, बल्कि शरीर को चलाने वाली आत्मा हैं।
जब तक मनुष्य आत्मा को नहीं पहचानता, तब तक जीवन में सच्ची शांति, स्थिरता और संतोष संभव नहीं हो सकता।
आत्मा क्या है? (What is Soul in Hindi)
आत्मा एक अमर, अविनाशी, चैतन्य शक्ति है जो इस शरीर को जीवन प्रदान करती है।
आत्मा न जन्म लेती है, न मरती है—वह केवल एक शरीर छोड़कर दूसरा शरीर धारण करती है।
आत्मा:
न दिखाई देती है
-
न कटती है
-
न जलती है
-
न नष्ट होती है
आत्मा को ब्रह्मा कुमारी ज्ञान में ज्योति बिंदु कहा गया है—
एक अत्यंत सूक्ष्म प्रकाश बिंदु, जो शरीर के मस्तिष्क के मध्य में स्थित होती है।
आत्मा और शरीर का अंतर
अधिकांश लोग शरीर और आत्मा को एक ही मान लेते हैं, जबकि दोनों में स्पष्ट अंतर है।
आत्मा:
चेतन है
-
सोचती है
-
अनुभव करती है
-
निर्णय लेती है
शरीर:
जड़ है
-
आत्मा के बिना निर्जीव है
-
समय के साथ बदलता है
-
नष्ट हो जाता है
उदाहरण:
जैसे ड्राइवर कार नहीं होता,
वैसे ही आत्मा शरीर नहीं है।
कार खराब हो सकती है, लेकिन ड्राइवर सुरक्षित बाहर निकल सकता है।
आत्मा की विशेषताएँ (Qualities of Soul)
हर आत्मा के भीतर कुछ मूल गुण होते हैं:
1. शांति
आत्मा का मूल स्वभाव शांति है।
अशांति आत्मा की नहीं, बल्कि विकारों की देन है।
2. प्रेम
सच्चा प्रेम आत्मा से आत्मा के बीच होता है, शरीर से नहीं।
3. पवित्रता
आत्मा मूल रूप से पवित्र है, लेकिन विकारों के कारण अपवित्र अनुभव करती है।
4. आनंद
आत्मा के भीतर आनंद का खजाना है, जो बाहर खोजने पर नहीं मिलता।
आत्मा कहाँ रहती है?
आत्मा शरीर के भीतर भृकुटि के मध्य, अर्थात् मस्तिष्क के केंद्र में स्थित होती है।
यहीं से आत्मा:
आँखों से देखती है
-
कानों से सुनती है
-
मुख से बोलती है
इसलिए कहा जाता है—
“आँखें आत्मा की खिड़कियाँ हैं।”
आत्मा और मन, बुद्धि, संस्कार
आत्मा के तीन मुख्य उपकरण होते हैं:
मन
जो सोचता है और भावनाएँ उत्पन्न करता है।
बुद्धि
जो निर्णय लेती है और विवेक प्रदान करती है।
संस्कार
जो हमारे पिछले अनुभवों और कर्मों का संग्रह होते हैं।
उदाहरण:
जैसे कंप्यूटर में हार्ड डिस्क होती है,
वैसे ही आत्मा में संस्कारों की स्मृति होती है।
आत्मा और कर्म का संबंध
आत्मा जो सोचती है, वही बोलती है और वही कर्म करती है।
इसी से कर्म सिद्धांत बनता है।
जैसे बीज बोओगे, वैसा फल पाओगे।
अगर आत्मा की सोच शुद्ध है:
कर्म श्रेष्ठ होंगे
-
भाग्य उज्ज्वल बनेगा
आत्मा जन्म-मरण के चक्र में कैसे आती है?
आत्मा अमर है, लेकिन शरीर नश्वर है।
इसलिए आत्मा:
एक शरीर छोड़ती है
-
दूसरा शरीर धारण करती है
इसे ही पुनर्जन्म कहा जाता है।
उदाहरण:
जैसे मनुष्य पुराने कपड़े उतारकर नए पहनता है,
वैसे ही आत्मा पुराने शरीर छोड़कर नया शरीर लेती है।
आत्मा कमजोर क्यों हो जाती है?
जब आत्मा:
स्वयं को शरीर समझने लगती है
-
काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार में फँस जाती है
-
परमात्मा से संबंध भूल जाती है
तो उसकी शक्तियाँ क्षीण होने लगती हैं।
इसे ही आत्मिक पतन कहा जाता है।
आत्मज्ञान क्या है?
आत्मज्ञान का अर्थ है—
स्वयं को आत्मा के रूप में पहचानना।
जब हम कहते हैं:
मैं आत्मा हूँ
-
मैं शांत हूँ
-
मैं पवित्र हूँ
तो आत्मा में सकारात्मक ऊर्जा जागृत होती है।
आत्मा और परमात्मा का संबंध
हर आत्मा का परम स्रोत परमात्मा शिव हैं।
वे:
निराकार हैं
-
जन्म-मरण से परे हैं
-
सभी आत्माओं के पिता हैं
जब आत्मा परमात्मा को याद करती है, तो:
उसकी शक्ति बढ़ती है
-
विकार समाप्त होते हैं
-
आत्मा पवित्र बनती है
उदाहरण:
जैसे मोबाइल चार्जर से जुड़कर चार्ज होता है,
वैसे ही आत्मा परमात्मा की याद से शक्तिशाली होती है।
राजयोग द्वारा आत्मा की शक्ति कैसे बढ़ती है?
राजयोग आत्मा और परमात्मा का योग है।
इस योग से:
आत्मा की बैटरी चार्ज होती है
-
मन शांत होता है
-
संस्कार शुद्ध होते हैं
राजयोग ध्यान में:
आत्मा स्वयं को ज्योति बिंदु अनुभव करती है
-
परमात्मा से शक्ति ग्रहण करती है
आत्मज्ञान से जीवन में क्या परिवर्तन आता है?
जब मनुष्य आत्मा को पहचानता है:
गुस्सा कम हो जाता है
-
डर समाप्त हो जाता है
-
रिश्ते मधुर हो जाते हैं
-
निर्णय शक्ति बढ़ जाती है
आत्मज्ञान जीवन को अंदर से बदल देता है।
मुरली का संदेश: आत्मा को पहचानो
मुरली में परमात्मा कहते हैं:
“तुम आत्मा हो, शरीर नहीं।”
जब यह बात जीवन में उतर जाती है,
तो जीवन स्वयं हल्का और शांत हो जाता है।
निष्कर्ष: आत्मा को जानना ही सच्चा ज्ञान है
आत्मा को जानना ही जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि है।
जब आत्मा स्वयं को पहचान लेती है:
दुख का अंत हो जाता है
-
शांति का अनुभव होता है
-
जीवन उद्देश्यपूर्ण बनता है
आत्मज्ञान हमें बाहर नहीं, भीतर की यात्रा कराता है।
Om Shanti 🙏

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